भारत-पाक के संबंधों को लेकर स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश

भारत-पाक के संबंधों को लेकर स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश



भारत-पाक के संबंधों विदेशी मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयरपर्सन : शशि थरूर) ने 11 अगस्त, 2017 को भारत-पाक संबंधों पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। कमिटी के मुख्य निष्कर्ष और सुझाव निम्नलिखित हैं : सीमा प्रबंधन और सुरक्षा : भारत और पाकिस्तान के बीच 3,323 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। यह देखते हुए कि सीमा के आस-पास एक तनावपूर्ण स्थिति रहती है, कमिटी ने सुझाव दिया कि सीमा सुरक्षा को मजबूती देने और उसे आधुनिक बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है। कमिटी ने सीमा के आस-पास सड़का का खराब स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उसने सुझाव दिया कि समयबद्ध तराक से व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली पाला को तैयार किया जाए। इसके अतिरिक्त भारतीय तट रक्षक और दूसरी एजेंसियों के बीच उच्च स्तरीय स्तराय समन्वय स्थापित करके तटीय सुरक्षा और चौकसी को मजबूत किया जाना कया जाना चाहिएइन एजासया में भारतीय नौसेना, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, कस्टम आर बदरगाह आत है। आतंकवाद : कमिटी ने सुझाव 1 सुशाप दिया कि 26/11 मुंबई हमले की जांच में तेजी लाने के लिए सरकार को पाकिस्तान पर दबाव बनाना आतारक्त उसन सुझाव या कि पाकिस्तान प्रायजित आतकवाद से निपटने के लिए सन्य आर असन्य, दाना प्रकार के नातिगत चाहिएकमिटी ने यह सुझाव भी दिया कि भारत के सुरक्षा प्रतिष्ठानों की संपूर्ण । प्रातष्ठाना का सपूण सुरक्षा का समाक्षा सुनिाश्चत का जानाजम्म और कश्मीर . कमिटी ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर का एक हिस्सा 1947 से पाकिस्तान के अवैध कब्जे में है। इसके अतिरिक्त उसने टिप्पणी की कि कश्मीरी यवाओं में अलगाव की भावना बढ़ रही 2 अलगाव की भावना बढ़ रही है. जिसका कारण कट्टपंथ, और रोजगार के अवसरों का अभाव है। कमिटी ने कहा कि इस संबंध में सरकार के कहा कि इस संबंध में सरकार के प्रयासों के अपेक्षित परिणाम नहीं मिले हैं। कमिटी ने सद्याव दिया कि सरकार हैं। कमिटी ने सुझाव दिया कि सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विकास जैसे उपाय करने चाहिए और यवानों को विशेष रूप से पाकिस्तान समर्थित कटरपंथ से पभावित होने से रोका कट्टरपंथ से प्रभावित होने से रोका जाना चाहिए। परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम : भारत और पाकिस्तान ने परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले के निषेध से जुड़े एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। कमिटी ने टिप्पणी की कि हालांकि भारत और पाकिस्तान, दोनों के पास परमाणु हथियार हैं लेकिन उनके परमाण सिद्धांत परस्पर विरोधी हैं। भारत परमाण हथियारों का पहला हैं। भारत परमाणु हथियारों का पहला प्रयोग नहीं करना की नीति का अनुपालन करता है,लेकिन पाकिस्तान नहीं। इसके अतिरिक्त मिसाइल और परमाण कार्यक्रमों में चीन और पाकिस्तान के बीच समन्वय बढ़ रहा है। इस संदर्भ में कमिटी ने सुझाव दिया है कि सरकार को अपनी परमाण क्षमता में वद्धि करनी चाहिए और समता विरोध करने की अपनी क्षमता को बढाना चाहिए। सर्जिकल स्टाइक : कमिटी ने सा टिप्पणी की कि सितंबर 2016 में नियंत्रण नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर भारतीय सेना द्वारा सीमित आतंकवाद विरोधी अभियान (सर्जिकल स्टादक) चलाया गया था। एलओसी के आस- पास आ पास आतंकवादी लॉन्च पैडस और पाकिस्तान से आतंकवादी हमलों की आशंका की खफिया जानकारी के आधार पर सर्जिकल स्ट्राइक की गई थी। कमिटी ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक एक संयमित प्रतिक्रिया का प्रदर्शन था जोकि भारत की सामरिक मरिक संयम की नीति का ही संकेत देती थी। कमिटी ने सुझाव दिया कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को प्रकाश में लाने के लाने के लिए राजनयिक पहल के साथ-साथ इस नीति को जारी रखा जाना चाहिए। आर्थिक भागीदारी : कमिटी ने भारत और पाकिस्तान के बीच आर्थिक संबंधों में तीन प्रवृत्तियों का उल्लेख किया। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं : दोनों देशों के बीच व्यापार की व्यापक क्षमता है, पिछले वर्षों के दौरान भारत ने पाकिस्तान से व्यापार अधिशेष बरकरार रखा है, और साप्टा (सार्क अधिमान्य व्यापार समझौता) संधि द्विपक्षीय व्यापार की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। डब्ल्यूटीओ समझौते के अंतर्गत भारत ने पाकिस्तान सहित सभी डब्ल्यूटाआ सदस्या का सर्वाधिक तरजाह वाल दश (मास्ट फवड नेशन-एमएफएन) का दर्जा दिया है। एमएफएन सिद्धांत विभिन्न देशों के समान उत्पादों के साथ भेदभाव को प्रतिबाधत करता हैं। हालांकि पाकिस्तान ने भारत को एमएफएन का दजा नहा दिया है। कामटा न सुझाव दिया कि पाकिस्तान को इस बात के लिए राजी किया जाना चाहिए कि वह भारत का एमएफएन का दजा द। इसके अतिरिक्त कमिटी ने यह सुझाव भा दिया कि सरकार का निम्नालाखत क लिए पाकिस्तान का राजा करना चाहिए : जमीनी रास्तों पर लगे व्यापार प्रतिबंधों को हटाना, और पाकिस्तान क निर्यात की अनुमति देना। कामटा न गा कमिटी ने गौर किया कि भारत आर पा और पाकिस्तान के बीच व्यापार को बढ़ावा दन के लिए 2012 म अटारा में एकीकृत चेक पोस्ट (आईसीपी) बनाए गा सबध म अनक सरचनात्मक समस्याओं का उल्लेख किया।